India Needs Strong Elderly Policy: भारत में मजबूत वृद्धजन नीति की जरूरत, 2036 तक 22 करोड़ होगी संख्या

Sun 30-Nov-2025,12:27 PM IST +05:30

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India Needs Strong Elderly Policy: भारत में मजबूत वृद्धजन नीति की जरूरत, 2036 तक 22 करोड़ होगी संख्या
  • भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 2036 तक 22 करोड़ होने के अनुमान से नीतिगत सुधारों और एक्टिव एजिंग मॉडल की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है।

  • केंद्र सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल सशक्तिकरण के लिए डे-केयर, हेल्पलाइन, स्वास्थ्य योजनाओं के विस्तार पर काम कर रही है।

Delhi / New Delhi :

नई दिल्ली / भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयोजित “आराधना” सांस्कृतिक कार्यक्रम न केवल कला और संस्कृति का उत्सव था, बल्कि भारत में तेजी से बढ़ती वृद्धजन आबादी की चुनौतियों और नीतिगत आवश्यकताओं पर ध्यान आकर्षित करने का महत्वपूर्ण मंच भी बना। कार्यक्रम के दौरान मंत्रालय ने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में 10 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं और 2036 तक यह संख्या 22 करोड़ पहुँच सकती है, जो देश के सामाजिक ढांचे के लिए एक बड़ी चुनौती और नया अवसर दोनों है।

कार्यक्रम का विषय “अनुभव से ऊर्जा तक” था, जो बुजुर्गों की जीवन-यात्रा, ज्ञान और समाज में उनकी भूमिका को नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है। मंच पर नीति निर्माताओं, विद्यार्थी, कलाकारों और वरिष्ठ नागरिकों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि देश में ‘एक्टिव एजिंग’ को बढ़ावा देना अब केवल विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 के अनुसार, राज्य वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए प्रभावी प्रावधान सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है। इसी सोच के तहत “माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007” लागू किया गया था, जिसने परिवार और समाज को वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को कानूनी स्वरूप में स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की जीवन-गाथा त्याग, संघर्ष और अनुभव से भरी—युवा पीढ़ी के लिए अनमोल मार्गदर्शन का स्रोत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मंत्रालय आने वाले समय में वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित योजनाओं को और अधिक मजबूत करेगा ताकि उन्हें सम्मान, सुरक्षा और सक्रिय जीवन का उचित वातावरण मिल सके।

हाल के वर्षों में वरिष्ठ नागरिकों पर केंद्रित नीतियों में बड़ा विस्तार हुआ है। मंत्रालय के “एक्टिव एजिंग” मॉडल के अनुसार, फिलहाल देश भर में विभिन्न राज्यों में डे-केयर सेंटर, हेल्पलाइन सेवाएँ, स्वास्थ्य सहायता कार्यक्रम और अंतर-पीढ़ीगत गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
जनसंख्या में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए मंत्रालय का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य, सुरक्षा, कल्याण, सामाजिक जुड़ाव और डिजिटल सशक्तिकरण के लिए संरचनात्मक ढांचे को और मजबूत किया जाए।

कार्यक्रम ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया भारत को अब एक ऐसी राष्ट्रीय नीति की आवश्यकता है जो न केवल बुजुर्गों के संरक्षण, बल्कि उनकी सक्रिय भागीदारी, डिजिटल सीख, और स्वास्थ्य सुरक्षा को केंद्र में रखे।